चेत सिंह घाट, वाराणसी

लेख - Aadi Kashi Desk

Last Updated on January 3, 2025 by Yogi Deep

चेत सिंह घाट काशी के उन घाटों में से एक है जिनका अपना एक अलग ही इतिहस है। वैसे तो काशी के सभी घाटों के बनने की अपनी एक अलग ही कहानी है लेकिन इनमें चेतसिंह घाट काशी के घाटों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह घाट न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ स्थित किले और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी इसे एक ऐतिहासिक धरोहर बनाती है। आइये जानते हैं काशी के इस घाट के इतिहस, इसकी कहानी, वारेन हेस्टिंग्स और चेतसिंह के बीच हुआ प्रसिद्ध युद्ध एवं घाट की विशेषताओं के बारे में…

चेत सिंह घाट

चेत सिंह घाट का निर्माण काशी के तत्कालीन राजा बलवंत सिंह द्वारा किया गया था। घाट के साथ ही एक विशाल किले का भी निर्माण हुआ था। इस किले की स्थिति काशी के प्रसिद्ध शिवाला मुहल्ले में होने के कारण इसे पहले शिवाला घाट के नाम से जाना जाता था। इसे बलवन्त सिंह के इजीनियर वैजनाथ मिश्र ने बनवाया था1 और यहीं से निकलकर चेतसिंह भागे थे। 1781 ई. में यहाँ वारेन हेस्टिंग्स और चेत सिंह के बीच प्रसिद्ध युद्ध हुआ था, जिसमें चेत सिंह पराजित हुए थे। जहाँ युद्ध में पराजित होने के बाद चेतसिंह को किला छोड़कर भागना पड़ा और लगभग 125 वर्षों तक इस किले पर अंग्रेजों का अधिकार रहा।

चेतसिंह किला

चेत सिंह घाट एवं किला
चेत सिंह घाट एवं किला

यह किला राजा चेत सिंह का निवास स्थान हुआ करता था। यहीं पर उन्हें वारेन हेस्टिंग्स के आदेश पर गिरफ्तार करने के लिए अंग्रेजी सेना पहुंची थी। जिसके पश्चात यहां युद्ध हो गया जिसमें राजा चेतसिंह पराजित हो गए। अंग्रेजी सैनिकों ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया परंतु उसी दिन यह खबर आती है कि राजा चेत सिंह अंग्रेजों के हाथ न लग सके एवं वह वहां से भागने में कामयाब रहे।

किले का पुनः अधिग्रहण

19वीं शताब्दी के अंत में, काशी के महाराज प्रभुनारायण सिंह ने अंग्रेजों से इस किले को पुनः प्राप्त किया। वर्तमान में यह किला महाराजा काशीराज ट्रस्ट के अधीन है। महाराजा प्रभुनारायण सिंह ने किले के उत्तरी भाग को नागा साधुओं (निरंजनी एवं निर्वाणी) को दान कर दिया। इससे शिवालाघाट चार भागों में विभाजित हो गया, जिनके नाम क्रमशः चेतसिंह, निरंजनी, निर्वाणी और शिवाला रखे गए।2 चेतसिंह घाट का नामकरण भी महाराजा प्रभुनारायण सिंह ने अपने पूर्वज चेतसिंह के नाम पर किया।

किले की संरचना और वास्तुकला

चेतसिंह घाट का किला अपनी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण बहुत प्रसिद्ध है। किले के दक्षिणी भाग में गंगातट से कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतरने के बाद विशाल पुश्ता (दिवार) स्थित है। उत्तरी भाग में किले का प्रवेश द्वार है, जिसके ऊपरी भाग में दो बुर्ज हैं। किले के इसी हिस्से में 16वीं और 17वीं शताब्दी की राजपूत शैली में निर्मित बारहदरी का निर्माण हुआ है, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए मशहूर है।

चेत सिंह किला
चेत सिंह किला

18वीं शताब्दी के इस किले में तीन प्रमुख शिव मंदिर भी स्थित हैं, जो काशी के धार्मिक धरोहर का हिस्सा हैं। ये मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि किले की ऐतिहासिक छवि को भी उभारते हैं।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व

चेतसिंह घाट का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व भी अत्यधिक है। 18वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी के पूर्वाद्ध तक यह घाट काशी के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों में से एक था। काशी का प्रसिद्ध बुढ़वा मंगल मेला यहाँ हर साल चैत्र माह के पहले मंगलवार से शुरू होकर एक सप्ताह तक आयोजित किया जाता था। हालांकि, पिछले कुछ दशकों से यह मेला रामनगर किले में आयोजित होता है और कुछ सांस्कृतिक संस्थाएँ इसे दशाश्वमेध घाट पर भी मनाती थीं।

घाट की विशेषताएँ

चेतसिंह घाट पर गंगा का बहाव अत्यधिक तीव्र होने के कारण यहाँ बहुत कम लोग स्नान करते हैं। हालांकि, इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता ने इसे पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक आकर्षक स्थल बना दिया है। घाट के पुनर्निर्माण का कार्य 1958 में राज्य सरकार द्वारा किया गया था, जिससे इसकी उपस्थिति और भी भव्य बन गई है।

घाट पर भीड़ भाड़ बहुत कम होती है एवं घाट का वातावरण बहुत ही शांत है। यहां पर्यटक प्रातः एवं संध्या बेला शाम के समय में आना पसंद करते हैं। किले के ऊपरी भाग में थोड़ी-थोड़ी खाली जगह है, जहां ढेर सारे तोते एवं कबूतर निवास करते हैं। आप दिन के समय इन्हें किले के छोटे-छोटे खाली जगह में घूमते एवं मस्ती करते हुए देख सकते हैं। 

श्री स्वयंभू प्रकट सुप्त हनुमान जी

चेत सिंह घाट एवं निरंजनी घाट के मध्य में स्थित श्री स्वयंभू प्रकट सुप्त हनुमान जी का मंदिर भी स्थित है, इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर हनुमान जी लेटे हुए अवस्था में विराजमान है।3 स्वयंभू अर्थात स्वयं से प्रकट हुई हनुमान जी की मूर्ति। यहाँ ऐसी मान्यता है की हनुमान जी की यह मूर्ति प्राकृतिक है एवं हनुमान जी नें ही राजा चेतसिंह की रक्षा अंग्रेजों से की थी।

श्री स्वयंभू प्रकट सुप्त हनुमान जी मंदिर
श्री स्वयंभू प्रकट सुप्त हनुमान जी मंदिर

निष्कर्ष

चेतसिंह घाट काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका किला, मंदिर, और स्थापत्य कला काशी की समृद्ध इतिहास को दर्शाते हैं। यह घाट न केवल धार्मिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि इतिहास, कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए भी एक अमूल्य धरोहर है। काशी के अन्य प्रमुख घाटों के साथ-साथ चेतसिंह घाट का महत्व भी नकारा नहीं जा सकता, और यह काशी के ऐतिहासिक परिदृश्य में एक अनमोल रत्न के रूप में चमकता है।

सन्दर्भ


  1. Kashi Ka Itihas by Dr. Moti Chandra ↩︎
  2. Kashi Ke Ghat Aur Unka Sanskritik Mahatva – Sahayak Nideshak Paryatan Karyalay Varanasi ↩︎
  3. Aadi Kashi ↩︎

Google Geo Location

आदि काशी - Aadi Kashi

Aadi Kashi आदि काशी के इस वेबसाइट पर आपका स्वागत है। इस वेबसाइट को काशी के अध्यात्मिक एवं प्राचीनता को समझने हेतु बनाया गया है। काशी यूं तो कई युगों पुराना है, परन्तु इसे समझना उतना ही जटिल है। बस इसी जटिलता को सरल बनाने के उद्देश्य से इस वेबसाइट को बनाया गया है।

Leave a Comment